19 फ़रवरी 2023

Bajirao Peshwa History Hindi |पेशवा बाजीराव का इतिहास

पेशवा बाजीराव का जन्म 18 अगस्त 1700 को एक भट्ट परिवार में  हुआ था इनका पूरा नाम बाजीराव बल्लाल भट्ट था 

 इनके पिता बालाजी विश्वनाथ और माता राधाबाई थी। 

इनका जन्म चितपावन कुल के ब्राह्मण परिवार में हुआ। इनको 'बाजीराव बल्लाढ' तथा 'थोरले बाजीराव' के नाम से भी जाना जाता 

उनके पिता मराठा साम्राज्य के चौथे  छत्रपति शाहूजी महाराज के प्रथम पेशवा यानी कि प्रधानमंत्री थे। बाजीराव का एक छोटा भाई भी था चिमाजी अप्पा।



बचपन से बाजीराव को घुड़सवारी , तीरन्दाजी, तलवार भाला, बनेठी, लाठी आदि चलाने का शौक था। 13-14 वर्ष की खेलने की आयु में बाजीराव अपने पिता के साथ घूमते थे।उनसे वह दरबारी चालों व रीतिरिवाजों को सीखा करते  थे।  जब बाजीराव के पिता का अचानक निधन हो गया तो मात्र बीस वर्ष की आयु मे बाजीराव को शाहूजी महाराज ने पेशवा बना दिया।

बाजीराव घुड़सवारी करते हुए लड़ने में सबसे माहिर थे । उनके पास 4 घोड़े थे, जिनका नाम नीला, गंगा, सारंगा और औलख था। अपने प्रिय घोडों की देखभाल बाजीराव स्वयं करते थे। पेशवा बाजीराव की लंबाई 6 फुट, हाथ लंबे, शरीर बलिष्ठ था। पूरी सेना को वो हमेशा बेहद सख्त अनुशासन में रखते थे।

शिवाजी महाराज की तरह वह बहुत ही कुशल घुड़सवार थे। घोड़े पर बैठे-बैठे भाला चलाना, बनेठी घुमाना, बन्दूक चलाना उनके बाएँ हाथ का खेल था। घोड़े पर बैठकर श्रीमन्तबाजीराव के भाले की फेंक इतनी जबरदस्त होती थी कि सामने वाला घुड़सवार अपने घोड़े सहित घायल हो जाता था।



1724 में शकरखेडला में बाजीराव पेशवा ने मुबारिज़खाँ को परास्त किया था।

1724 से 1726 तक मालवा तथा कर्नाटक पर प्रभुत्व स्थापित कर लिया।

1728 में पालखेड़ में महाराष्ट्र के शत्रु निजामउलमुल्क को पराजित करके उससे चौथ तथा सरदेशमुखी वसूली की।

1728 में मालवा और बुंदेलखंड पर आक्रमण कर मुगल सेनानायक गिरधरबहादुर तथा दयाबहादुर पर विजय प्राप्त की।

1729 में मुहम्मद खाँ बंगश को परास्त किया 


 1731 में दभोई में त्रिंबकराव को नतमस्तक कर बाजीराव ने आंतरिक विरोध का दमन किया।

सीदी, आंग्रिया तथा पुर्तगालियों एवं अंग्रेजो को भी बहुत ही बुरी तरह पराजित किया।





पेशवा बाजीराव की पहली पत्नी का नाम काशीबाई था जिसके 3 पुत्र थे- बालाजी बाजी राव , उर्फ नानासाहेब  , रघुनाथ राव जिसकी बचपन में ही मृत्यु हो गई और रामचंद्र ।

 पेशवा बाजीराव की दूसरी पत्नी का नाम  मस्तानी था , जो छत्रसाल के राजा की बेटी थी।  बाजीराव ने उनके लिए पुणे के पास एक महल  बनवाया जिसका नाम उन्होंने 'मस्तानी महल' रखा।  1734 में बाजीराव और मस्तानी का एक पुत्र हुआ जिसका नाम कृष्णा राव रखा गया

जो बाद में शमशेर बहादुर प्रथम कहलाया।  




जब बाजीराव पेशवा बने तब छत्रपति शाहू नाममात्र के शासक थे, वे ज्यादातर अपने महल सतारा में ही रहा करते थे. मराठा साम्राज्य चलता छत्रपति शाहू जी के नाम पर था, लेकिन इसे चलाते  पेशवा  थे. बाजीराव एक बहुत अच्छे योद्धा होने के साथ साथ, अच्छे सेनापति भी थे. मराठों के पास एक विशाल सेना थी, जिसे अपनी सूझबूझ से बाजीराव चलाते थे. यही वजह है, थोड़े ही समय में उनका नाम पुरे देश  में फ़ैल गया. भारत के उत्तर में उन्होंने जल्द ही मराठो  झंडा लहरा दिया.


छत्रसाल पन्ना राज के बुंदेलखंड में शासन करते थे. 1728 के समय मुगलों ने उन पर आक्रमण कर दिया. तब राजा ने अपनी बेटी को बाजीराव के पास मदद के लिए  भेजा । उस समय बाजीराव मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड प्रान्त में ही थे    


कहा जाता है भोजन की थाली छोड़कर बाजीराव अपनी सेना के साथ राजा छत्रसाल की मदद को बिजली की गति से दौड़ पड़े।  

ऐसा कहते हुए

अगर मुझे पहुँचने में देर हो गई तो इतिहास लिखेगा कि एक राजपूत ने मदद मांगी और ब्राह्मण भोजन करता रहा।"


बाजीराव की मदद से छत्रसाल मुगलों को हराय मस्तानी बाजीराव की युद्ध कौशल को देख कर बहुत प्रभावित होती है. . जिसके बाद बाजीराव उनसे शादी कर अपनी दूसरी पत्नी बना लेते है.


अमेरिकी इतिहासकार बर्नार्ड माण्टोगोमेरी के अनुसार बाजीराव पेशवा भारत के इतिहास के सबसे महानतम सेनापति थे। पालखेड़ युद्ध में जिस तरीके से उन्होंने निजाम की सेनाओं को पराजित किया ऐसा सिर्फ बाजीराव प्रथम ही कर सकते थे

 मांटगोमरी ने भी अपनी किताब 'हिस्ट्री ऑफ वॉरफेयर' में बाजीराव की बिजली की गति से तेज आक्रमण शैली की जमकर तारीफ की है और लिखा है कि बाजीराव कभी हारे नहीं। आज वो किताब ब्रिटेन में डिफेंस स्टडीज के कोर्स में पढ़ाई जाती है।


1740 में बाजीराव किसी राजनैतिक काम से , इंदौर के पास खरगोन गए थे. वहां उन्हें अचानक तेज बुखार आया, उस समय उनके साथ काशीबाई, उनकी माँ व नानासाहेब भी थे. लेकिन तापघात के चलते उनकी 28 अप्रैल 1740 में  मौत हो गई 

बाजीराव का अंतिम संस्कार रावड़खेड़ के पास नर्मदा नदी के पास  ही हुआ.


1990 में बाजीराव पर मराठी सीरियल राव बनाया गया था.

2010 में  मराठी में ‘श्रीमंत पेशवा बाजीराव मस्तानी’ नाम का सीरियल बनाया गया 

2015 में बॉलीवुड के  बड़े डायरेक्टर संजय लीला भंसाली ने बाजीराव मस्तानी नाम की  फिल्म बनाई  |


 

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