25 फ़रवरी 2023

महात्मा गांधी जीवन परिचय! Mahatma Gandhi Biography in Hindi

हमारे इस स्वतन्त्रता संग्राम में देश के अनेक महापुरुषों ने अपना योगदान दिया है। भारत जैसे विविधता से भरे देश में पूरी जनता को अगर स्वतंत्रता संग्राम के लिए एकीकृत रूप से संगठित करने का श्रेय किसी महापुरुष को जाता है तो वह महात्मा गांधी है। 
महात्मा गांन्धी



 भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा की राह पर चलते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करते है।

 महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 ko गुजरात के पोरबंदर में हुआ था | इनके पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था | महात्मा गांधी का असली नाम मोहनदास करमचंद गांधी था और यह अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। गांधी जी का सीधा-सरल जीवन इनकी मां से प्रेरित था। ब्रिटिश हुकूमत में इनके पिता पोरबंदर और राजकोट के दीवान थे।


सनातन धर्म के पंसारी जाति से संबंध रखते थे. इनके पिता कट्टर हिंदू एवं ब्रिटिश सरकार के अधीन गुजरात में काठियावाड़ की रियासत पोरबंदर के प्रधानमंत्री थे। गांधी जी की माता परनामी वैश्य समुदाय की थी। महात्मा गाँधी के अन्य नाम बापू, राष्ट्रपति, गांधी जी थे.गांधी जी का विवाह 1883 में 13 वर्ष की आयु में कस्तूरबा से हुआ था। गांधीजी” कस्तूरबा” को “बा” कह कर बुलाते थे। उनका यह बाल विवाह उनके माता -पिता के द्वारा तय किया गया था। महात्मागांधी के चार पुत्र थे जिनके नाम 
हरिलाल गांधी 
मणिलाल गांधी 
रामदास गांधी और
देवदास गांधी।      

गांधी जी की प्रारम्भिक शिक्षा पोरबंदर में हुई थी। पोरबंदर से उन्होंने मिडिल स्कूल तक की शिक्षा प्राप्त की, 
 पिता का राजकोट ट्रांसफर हो जाने की वजह से इन्होंने राजकोट से अपनी बची हुई शिक्षा पूरी की। साल 1887 में राजकोट हाई स्कूल से मैट्रिक पास की और आगे की पढ़ाई के लिये भावनगर के सामलदास कॉलेज में प्रवेश लिया,

  घर से दूर रहने के कारण वह अपना ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाएं और अस्वस्थ होकर पोरबंदर वापस लौट गए। 4 सितम्बर 1888 को इंग्लैण्ड के लिये रवाना हुए। 

गांधीजी ने लंदन में लंदन वेजीटेरियन सोसायटी की सदस्यता ग्रहण की और इसके कार्यकारी सदस्य बन गये। गांधी जी लंदन वेजीटेरियन सोसाइटी के सम्मेलनों में भाग लेने लगे और पत्रिका में लेख लिखने लगे। यहां 3 सालों तक रहकर बैरिस्टर की पढ़ाई पूरी की और लंदन में थियोसोफिकल नामक सोसाइटी के मुख्य सदस्यों से मिले। 

सोसायटी की स्थापना विश्व बंधुत्व के लिए 1875 में हुई थी और तो और इसमें बौद्ध और सनातन धर्म के ग्रंथों का संकलन भी था। इंग्लैंड से अपनी बैरिस्टर की पढाई पूरी करने के पश्चात 1914 में गांधी जी भारत लौट आए। देशवासियों ने उनका भव्य स्वागत किया ।

 गांधीजी भारत लौटे तो एक समारोह में उनका स्वागत मोहम्मद अली जिन्ना ने किया था भारत लौटने के बाद गांधीजी राजकोट में आकर वकालत करने लगे। इसी बीच दक्षिण अफ्रीका में भारतीय व्यापारी सेठ अब्दुल्ला के बुलावे पर वे उनका मुकदमा लड़ने के लिए दक्षिणअफ्रीका चले गए।
 वहां डरबन से ट्रैन के माध्यम से उन्हें प्रिटोरिया जाना था जिसके लिए उन्होंने रेल की फर्स्ट क्लास का टिकट लिया। उन दिनों अफ्रीका में अश्वेत और एशियन लोगो को फर्स्ट क्लास डिब्बे में बैठने की अनुमति नहीं थी इसलिए अंग्रेज टिकट चेकर ने गांधीजी को पीटरमारिट्जबर्ग स्टेशन पर धक्के मारकर बाहर निकाल दिया।

इस घटना ने गांधीजी को अंदर से झकझोर दिया और उन्होंने इस नस्लभेद के खिलाफ आवाज उठाने का बीड़ा उठा लिया। 

फरवरी 1919 में अंग्रेजों के बनाए रॉलेट एक्ट कानून पर, जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए जेल भेजने का प्रावधान था, उन्होंने अंग्रेजों का विरोध किया। फिर गांधी जी ने सत्याग्रह आंदोलन की घोषणा कर दी। इसके परिणामस्वरूप एक ऐसा राजनीतिक भूचाल आया, जिसने 1919 के बसंत में समूचे उपमहाद्वीप को झकझोर दिया।

इसके बाद उनके जीवन की असल यात्रा शुरू हुई जो अहिंसा आंदोलन से लेकर उनके राष्ट्रपिता बनने तक, और उनके जीवन पर्यंत चलती रही...।  
 

  उन्होंने अगले चार वर्ष भारतीय स्थिति का अध्ययन करने तथा उन लोगों को तैयार करने में बिताए जो सत्याग्रह के द्वारा भारत में प्रचलित सामाजिक व राजनीतिक बुराइयों को हटाने में उनका साथ दे सकें। 
 
 
इस सफलता से प्रेरणा लेकर महात्‍मा गांधी ने भारतीय स्‍वतंत्रता के लिए किए जाने वाले अन्‍य अभियानों में सत्‍याग्रह और अहिंसा के विरोध जारी रखे, जैसे कि 'असहयोग आंदोलन', 'नागरिक अवज्ञा आंदोलन', 'दांडी यात्रा' तथा 'भारत छोड़ो आंदोलन'। गांधी जी के इन सारे प्रयासों से भारत को 15 अगस्‍त 1947 को स्‍वतंत्रता मिली। 

30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गांधी के सीने पर तीन गोलियां दागकर उनकी हत्या की थी। 

 गांधी के सत्याग्रह आन्दोलन की वजह से जब गोडसे जेल गए तो वहीं से नाथूराम के मन में गांधी के लिए नफरत के भाव उभर आए।. कई ऐसे पल भी आए जब यह नफरत और बढ़ती गई । और फिर 1937 में वीर सावरकर को गोडसे ने अपना गुरु माना। देश के बंटवारे से गोडसे हिल चुका था। 
गोडसे मानता था कि भारत के बंटवारे और तब जो साम्प्रदायिक हिंसा हुई उसमें लाखों हिन्‍दुओं के मारे जाने के जिम्मेदार महात्मा गांधी हैं। ऐसे में उन लोगों ने गांधी की हत्या की पूरी प्लानिंग की और दिल्ली के बिड़ला भवन में जब प्रार्थना सभा खत्म हुई तो महात्मा गांधी बाहर निकलने लगे और इसी दौरान उनके पैर छूने का बहाना करते हुए गोडसे झुका और बैरेटा पिस्तौल से उनको तीन गोलियां दाग दीं। . 

गोडसे को हत्या का दोषि मानते हुए 15 नवंबर 1949 को अंबाला सेंट्रल जेल में फांसी दी गई थी। 

महात्मा गांधी का जन्मदिवस 'गांधी जयंती' के रूप में मनाया जाता है। चूंकि महात्मा गांधी जी द्वारा अहिंसा आंदोलन चलाया गया था, इसलिए विश्व स्तर पर उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए इस दिन को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

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